Friday, 23 March 2012

शतकों का शतक - सचिन का महाशतक

मीरपुर मे बांग्लादेश के खिलाफ सौवा अंतर्राष्ट्रीय शतक जड़कर सचिन ने 16 मार्च 2012 के दिन को एतिहासिक बना दिया । सर्वकालिक महानतम क्रिकेटर बनने के पीछे है उनकी एकाग्रता तथा खेल के प्रति समर्पण । कई  क्रिकेटर आते है पाँच-छह साल खेलते है और फिर क्रिकेट से कमाई दौलत उन पर हावी हो जाती है । पर सचिन 22 वर्ष से उसी एकाग्रता से खेल रहे है । वह एकाग्रता तथा ध्यानपूर्वक गेंदबाजों की गेंदों को खेलते है । फिर सामने चाहे लसिथ मललिंगा हो या ब्रेट ली । जैसे अर्जुन को सिर्फ चिड़िया की आँख दिखाई देती है वैसे ही सचिन को सिर्फ गेंद तथा बाउंडरी दिखाई देती है । उनकी इसी एकाग्रता ने उन्हे सर्वश्रेस्ठ बल्लेबाज़ बना दिया । उनके खेल का दिलचस्प पहलू उनकी यह सोच है की किसी भी गेंदबाज  की गेंदों को बाउंडरी पार कराया जा सकता है ।
सचिन सचमुच भारत के रत्न है । भारत रत्न उन्हे मिले या न मिले सचिन किसी पहचान के मोहताज नहीं है । राष्ट्रीय और अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर उनके प्रशंशकों की लम्बी कतार है । तेंदुलकर अंतर्राष्ट्रीय क्रिकेट मे 100 शतक जड़ने वाले दुनिया के पहले बल्लेबाज़ है । यह उपलब्धि देश के लिए गौरव की बात है ।

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