इंडोनेशिया के समुद्री छेत्र मे बुधवार को आये शक्तिशाली भूकंप के बाद भारत सहित हिंद महासागर से जुड़े सभी देशों में सुनामी का खतरा पैदा हो गया । सुनामी लहरे सिर्फ समुद्री तूफान नहीं है बल्कि भूकंप जनित समुद्री तूफान है । गहरे समुद्री जल मे उत्पन्न सुनामी लहरों की वेवलेंग्थ 500 कि.मी से अधिक होती है । सुनामी के उत्पात्ति स्थल पर यदि समुद्र 20,000 फीट गहरा है तो सुनामी लहरे 700-800 कि.मी प्रति घंटे कि रफ्तार से आगे बड़ेगी । इस तरह स्पष्ट है कि इस गति से ये सुनामी लहरे जेट विमान कि गति को भी पीछे छोड़ सकती है ।
सोधकर्ताओ ने सैटलाइट रेडार के जरिये पता लगाया है कि अंटार्कटिका के तापमान मे लगातार वृद्धि के कारण वहा सालाना चार मीटर से लेकर 24 मीटर तक बर्फ़ पिघल जाती है , जिसका प्रभाव समुद्र के जल स्तर पर पढ़ रहा है । तथ्य बताते है कि क्लोरिन, फ़्लोंरिन तथा कार्बन परमाणुओ के तालमेल से बना क्लोरोंफ़्लोंरों कार्बन का एक अणु Co2 के अणु की तुलना मे 14 हज़ार गुना अधिक गर्मी पैदा करता है और धरती के तापमान को 25 फीसदी से भी अधिक बढा देता है । समुद्र के तापमान मे 0.1 डिग्री सेंटीग्रेड कि बढ़त से अंटार्कटिका मे 1 मीटर बरफ़ पिघल जाती है । माउंट एवरेस्ट की ऊचाई भी 8848 मीटर से घटकर 8844 मीटर रह गयी है । गंगोत्री ग्लैसियर भी कई कि .मी पीछे खिसक गया है । अगर पृथ्वी के तापमान बढ़ने कि यही गति बनी रही तो ग्लैसियरों के पिघलने कि रफ्तार बढ़ने से सागरों के जल स्तर मे और वृद्धि होगी ।
धरती पर बदलते मौसम के मिजाज और तापमान मे अप्रत्याशित वृद्धि से अब यह सिद्ध हो चला है कि ये घटनाए प्राकृतिक न होकर मनुष्य जनित ही है । जलवायु परिवर्तन एक व्यापक तथा दीर्घकालीन चुनोंती है तथा यह विश्व के प्रत्येक भाग के लिए बेहद खतरनाक है । मानव अपनी सुख सुविधाओ के लिए वृक्षों की अंधाधुंध कटाई कर रहा है । इससे पृथ्वी पर वन छेत्र के प्रतिशत मे कमी आ गयी है । वैज्ञानिक आकड़े बताते है की पर्यावरण संतुलन के लिए पृथ्वी के भू भाग का 13 प्रतिशत वन होना चाहिए । पृथ्वी पर वर्षा मे कमी आ गयी है , मनुष्य की आयु घट रही है , पृथ्वी का तापक्रम बढ़ रहा है और सबसे खतरे की बात तो यह है कि हमारे सुरक्षा कवच ओजोन परत मे छेद हो गया है । ये सब मानव जाती के अस्तित्व के लिए खतरे कि घंटी है ।